Wednesday, 11 February 2015

कश्मीर त्रासदी : हर दिन एक सेव खा कर बचाई जान

गोपालगंज निवासी नाजीमुल हक कश्मीर में भीषण बाढ़ के उस भयावह मंजर को शायद जिंदगी भर भुला नहीं पाएगा, जब उसने तीन मंजिली इमारत पर छह दिन तक केवल एक सेव खा कर जैसे-तैसे अपनी जान बचाई। लगभग 550 स्क्वायर फीट की छत पर वह अकेला नहीं था। उसके साथ पचास लोग और थे। छत पर तिल भर की जगह नहीं थी। ठिठुरती ठंड में एक-दूसरे को पकड़कर मौत से आंख मिचौनी खेल रहे थे। जब वह हिमगिरी एक्सप्रेस से पटना जंक्शन के प्लेटफार्म संख्या तीन पर उतरा तो होठों पर एकाएक मुस्कुराहट छा गई। 
नाजीमुल के साथ आए 43 पीडि़तों ने बताया कि वे सभी कश्मीर के माकदाह में सेंट्रिंग मिस्त्री का काम करते हैं। सभी उत्तर बिहार के विभिन्न जिलों के रहने वाले हैं। वे वहां एक तीन मंजिली इमारत का निर्माण कर रहे थे। अचानक आई बाढ़ के कारण निर्माण कर रुक गया। जैसे-जैसे सड़क पर पानी का स्तर बढ़ता गया, वैसे-वैसे वे माले चढ़ते गए। लगभग पंद्रह फीट पानी आने के बाद इमारत का एक तल पूरा और दूसरा तल आधा डूब गया। इसके बाद वे छत पर चले गए। उनके पास दो पेटी सेव बची थी। खाने वाले पचास। हर दिन भूख मिटाने के लिए एक सेव खाते थे, फिर पेटी बंद कर देते थे। सबके कपड़े फट गए थे, लेकिन जीवित रहने की उम्मीद में वह जैसे-तैसे खड़े रहे।
वहीं जम्मू से लौट सीआरपीएफ के जवान शक्ति चंद ने कहा कि वह छपरा का रहने वाला है। छुट्टियां समाप्त होने के बाद वह योगदान करने श्रीनगर के लालबाग जा रहा था। जम्मू तवी पहुंचने पर जानकारी मिली कि बाढ़ के कारण कश्मीर जाने का रास्ता बंद हो गया है। इसके बाद उसने जम्मू स्थित मुख्यालय में आला अफसरों से बात की। तीन दिन तक इंतजार करने के बाद उसे वापस घर भेज दिया। शक्ति चंद की मानें तो उसके अलावा करीब सौ जवानों को छुट्टी दे दी गई।

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